वित्त एवं विकास निगम

 

संपर्क

श्री गौतम पासवान, बि.प्र.से., प्रबंध निदेशक.

दूरभाष: (0612)-226099. फैक्स: (0612)-226099.

 

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बिहार राज्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम - गठन का उद्देश्य

बिहार राज्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (Bihar State Backward Classes Finance & Development Corporation) कल्याण विभाग, बिहार सरकार के नियंत्रणाधीन इकाई है जिसकी स्थापना कम्पनी अधिनियम, 1956 के अधीन वर्ष 1993 में की गयी। इस निगम का मूल उद्देश्य राज्य के पिछड़े वर्ग के सदस्यों का अर्थिक उत्थान किया जाना है। यह निगम राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम की योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए बिहार राज्य का चैनेलाईजिंग एजेन्सी है। इस निगम द्वारा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के सहयोग से 85-90 प्रतिशत सावधि ऋण (Term Loan) तथा राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गई हिस्सा पूंजी अंशदान से (5-10 प्रतिशत) मार्जिन मनी (Margin Money) के रूप में राज्य के पिछड़े वर्ग के लोगों को स्वरोजगार हेतु ऋण उपलब्ध कराया जाता है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम से ऋण प्राप्त करने हेतु राज्य सरकार द्वारा 25 करोड़ रूपये की ब्लॉक गारंटी (Block Govt. Guarantee) उपलब्ध करायी गई है तथा साथ ही साथ निगम के अधिकृत हिस्सा पूंजी मद में 25 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

निगम का मूल उद्देश्य

  1. पिछड़े वर्ग के सदस्यों को लाभ पहुँचाने के लिए आर्थिक विकास की योजना लेना.

  2. आर्थिक विकास की योजनाओं हेतु सरकार द्वारा निर्धारित आर्थिक मापदण्डों के आधार पर पिछड़े वर्ग के लाभार्थियों को तकनीकी तथा वित्तीय योजनाओं हेतु ऋण मुहैया किया जाना.

  3. पिछड़े वर्ग के सदस्यों के तकनीकी/प्रोफेशनल शिक्षा के लिए ऋण सुविधाएँ उपलब्ध कराया जाना तथा समय-समय पर ट्रेनिंग आदि देकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना.

निगम की योजनाएँ

  1. सामान्य ऋण (टर्म लोन) योजनाएँ - निगम की ओर से हैण्डलूम, सिल्क, तेल धानी, रंगाई-छपाई दुकान, कपड़े की दुकान, कृषि यंत्र, दर्जी की दुकान, आटा-चक्की, मांस दुकान, हैण्डलूम कॉटन, बिजली मोटर बाईडिंग, जेनरल स्टोर, वर्कशाप, मिठाई दुकान, चूड़ी एवं सौन्दर्य प्रसाधन, बीज एवं कीटनाशक दुकान, बैलगाड़ी, सैलून, मछली पालन, किराना दुकान, ऑटो टायर रिपेयर, बागवानी, एस.टी.डी. बूथ, मोटर स्पेयर पार्टस की दुकान, कम्बल बुनाई, फोटो कॉपियर, रेडिमेड कपड़े की दुकान, स्टेशनरी दुकान, ट्रैक्टर, गाय डेयरी, खाद की दुकान, बढ़ईगिरी, दवा दुकान, पॉल्ट्री फार्मिंग, लाह-चूड़ी, बिजली सामान की दुकान, गेट-ग्रील फैब्रीकेशन, मछली जाल, मछली बिक्री दुकान, टी.वी. सर्विसिंग सेन्टर, ऑटो रिक्शा, होटल-ढ़ाबा, फ्लाईंग टेम्पू, बेकरी यूनिट, भैंस डेयरी, जेनरेटर और डेकोरेशन, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, लेमिनेशन एवं बाइन्डिंग, विडियोग्राफी, मशीन शॉप आदि की स्वीकृति दी गई है। इन योजनाओं में लाभार्थी की वार्षिक पारिवारिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 40,000/- रूपये एवं शहरी क्षेत्र में 55,000/- रूपये तक होनी चाहिए।

  2. स्वर्णिम योजना - पिछड़े वर्ग की महिलाओं के स्वरोजगार व आर्थिक विकास के लिए विशेष योजना - इस योजना में सामान्य योजना से कम सूद दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना में लाभार्थी की वार्षिक पारिवारिक आय 50,000/- रूपये तक होनी चाहिए।

  3. शिक्षा ऋण योजना - निगम द्वारा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के सहयोग से शिक्षा ऋण योजना शुरू की गई है। वैसे विद्यार्थी जो MBA, MCA, MBBS, B.Tech., B.E., B.Sc. (Engg). या MAICTE/ME मान्यता प्राप्त कोर्स कर रहे हैं उन्हें यह ऋण दिया जा रहा है। राज्य के पिछड़े वर्ग के ऐसे गरीब परिवारों के विद्यार्थी जिनका प्रवेश राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं जैसे - IIT, IIM, AIMS, IIIT में हुआ है उन्हें यह ऋण देने में प्राथमिकता दी जानी है। इस योजना में लाभार्थी की वार्षिक पारिवारिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 40,000/- रूपये एवं शहरी क्षेत्र में 55,000/- रूपये तक होनी चाहिए।

  4. स्वयं सक्षण योजना - निगम द्वारा पिछड़े वर्ग के व्यवसाय की शिक्षा/प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले बेरोजगार युवक/युवतियों को स्वरोजगार के लिए इस नई योजना को शुरू किया गया है ताकि इन्हें स्वरोजगार का बेहतर अवसर मिल सके। इस योजना के अंतर्गत लाभार्थी को अधिकतम 5 लाख रूपये तक ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसके अंतर्गत उदाहरणस्वरूप निम्न योजनाएँ होंगी - चिकित्सा, आर्किटेक्ट, इंजिनियरिंग, वकालत, लेखा-परीक्षा, होटल मैनेजमेंट, गृह सज्जा, पब्लिसिटी एवं विज्ञापन, सर्विस एवं मेंटेनेन्स, सुरक्षा कर्मी एजेन्सी, फैशन डिजाइनिंग, बुटिक, हस्तशिल्प, कोचिंग सेन्टर, टूरिज्म विकास, प्रिन्टिंग प्रेस, टेक्सटाईल डिजाइनिंग, आदि। योजना विशेष के लिए आवेदक के पास मान्यताप्राप्त डिग्री/डिप्लोमा या प्रशिक्षण का प्रमाण-पत्र होना अनिवार्य है।

  5. माईक्रो फाईनेन्स योजना - निगम की ओर से लक्षित वर्ग द्वारा लघु उद्योग स्थापित करने हेतु ऋण योजना (Micro-Finance Scheme) की शुरूआत की गई है। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम ऋण राशि 25.00 तक प्रति लाभार्थी ऋण के रूप में दिया जा सकता है। इस ऋण का वितरण स्वयं सेवा समूहों के माध्यम से किया जायेगा तथा स्वयं सेवा समूह में व्यक्तियों की अधिकतम संख्या 20 होगी। लाभार्थी की वार्षिक पारिवारिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 40,000/- रूपये एवं शहरी क्षेत्र में 55,000/- रूपये तक होनी चाहिए तथा एक समूह में 75% संख्या पिछड़े वर्ग की हो सकती है और शेष अन्य 25% अन्य कमजोर वर्गों जिसमें अनुसूचित जाति/जनजाति, अल्पसंख्यक  एवं विकलांग या युद्ध में विधवा हुई महिलाओं को सम्मिलित किया जा सकता है।

उपलब्धियाँ

  1. ऋण वितरण - निगम द्वारा वर्तमान वित्तीय वर्ष में शिक्षा ऋण मद में कुल 79 लाभार्थियों को (जिनका पूर्व में निगम के साथ ऋण अनुबंध हो चुका है) किश्त राशि कुल 34,67,011.00 रूपये अब तक विमुक्त किये जा चुके हैं। वर्तमान वर्ष में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, नई दिल्ली से नये विद्यार्थी के लिए राशि नहीं प्राप्त होने के कारण इस ऋण योजना में नये विद्यार्थी को नहीं शामिल किया जा सका है।

  2. प्रशिक्षण कार्यक्रम - वर्तमान वित्तीय वर्ष में निगम द्वारा पिछड़े वर्ग के युवक-युवतियों को स्वरोजगार एवं कारीगरी कुशलता वृद्धि के लिए राष्ट्रीय डिप्लोमा में 120 लाभार्थी, मोबाईल फोन रिपेयरिंग कोर्स में 40 लाभार्थी, विडियो एवं डिजिटल कैमरा शूटिंग कोर्स में 60 लाभार्थी, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान्य रिपेयरिंग कोर्स में 100 लाभार्थी, स्टेबलाईजर-यू.पी.एस.-इन्वर्टर कोर्स में 50 लाभार्थी, टी.वी.-वी.सी.डी. रिपेयरिंग कोर्स में 100 लाभार्थी एवं मोटर ड्राईविंग कोर्स में 50 लाभार्थी (कुल 520 लाभार्थी) को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त निगम के द्वारा समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार, पटना के दिशा-निर्देशन में राज्य के सभी वर्ग के नि:शक्त जनों (विकलांग व्यक्तियों) को सम्मानपूर्वक जिंदगी जीने के लिए शिक्षा एवं स्वरोजगार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बिहार सरकार द्वारा वित्त प्रदत्त दो महत्वपूर्ण ऋण योजना की शुरूआत की गई है जो इस प्रकार है -

  1. मुख्यमंत्री निःशक्त जन स्वरोजगार ऋण योजना - राज्य के निःशक्तजनों के कल्याण के लिए एक अति महत्वाकांक्षी स्वरोजगार ऋण योजना शुरू की जा रही है। इस योजनान्तर्गत (क) लघु उद्योग/लघु व्यवसाय में स्व-नियोजन (ख) विकलांग उद्यमियों को सहायता (उत्पादन एवं उत्पाद क्षेत्र में) (ग) कृषि कार्य के क्षेत्र में (घ) विकलांग व्यक्तियों के लिए आवश्यक साधन के निर्माण के लिए (ड़) कारीगरी एवं उद्यमी विकास कार्य के लिए ऋण लिया जा सकता है। इस ऋण योजना के प्रति लाभार्थी की अधिकतम ऋण सीमा 1,50,000 रूपये होगी। इसका वार्षिक सूद दर 5 (पाँच) प्रतिशत ब्याज होगा। ऋण अदायगी 5 वर्ष में करनी होगी। स्वरोजगार ऋण योजना में लाभार्थी का चयन संबंधित जिले के सामाजिक सुरक्षा कोषांग के अधीन गठित समिति द्वारा किया जायेगा। इस ऋण के वितरण में तकनीकी या व्यवसायिक शिक्षा/प्रशिक्षण प्राप्त विकलांग व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जायेगी ताकि वे सफलतापूर्वक अपने व्यवसाय का संचालन कर सकें।

  2. मुख्यमंत्री निःशक्त जनशिक्षा ऋण योजना - राज्य के वैसे निःशक्त विद्यार्थी जो डिप्लोमा, एम.बी.ए., एम.सी.ए., बी.टेक.,बी.ई./बी.एस.सी. (इंजीनियरिंग), लॉ, पारा मेडिकल इत्यादि ए.आई.सी.टी.ई., एस.सी.आई या समकक्ष मान्यताप्राप्त अन्य तकनीकी/व्यवसायिक कोर्स की पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं, उन्हें यह ऋण दिया जायेगा। इस ऋण की अधिकतम सीमा 5 लाख रूपये होगी। इसका वार्षिक सूद दर 4 प्रतिशत साधारण ब्याज होगा। ऋण अदायगी पढ़ाई पूरी होने के पश्चात 5 वर्ष में करना होगा। शिक्षा ऋण योजना में लाभार्थी का चयन निगम मुख्यालय स्तर पर गठित समिति द्वारा किया जायेगा।

पात्रता - उक्त दोनों ऋण योजना में वैसे लाभार्थी जो 40 प्रतिशत या अधिक विकलांग हों (सक्षम चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा निर्गत प्रमाण-पत्र के आधार पर) वह ऋण पाने में सक्षम होंगे। लाभार्थी की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 1,60,000/- रूपये एवं शहरी क्षेत्र में 2,00,000/- रूपये से अधिक न हो।

निगम द्वारा उक्त दोनों योजनाओं को सफल कार्यान्वयन लक्ष्य प्राप्ति हेतु हर संभव कार्रवाई की जा रही है।

वित्तीय वर्ष 2009-10 में शिक्षा ऋण योजना में पूर्व में ऋण अनुबंधित विद्यार्थियों के बीच 21,99,365.00 रूपये मात्र विमुक्त किया गया है।

वर्तमान वित्तीय वर्ष 2010-11 से 2011-12 तक राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम से टर्म ऋण प्राप्त नहीं होने के कारण पूर्व के ऋणीयों को निगम के कोष से आवश्यक ऋण उपलब्ध कराया गया है।

वित्तीय वर्ष 2012-13 में निगम के हिस्सा पूंजी के रूप में रु. 100.00 लाख का बजट उपबंध किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2013-14 में निगम के हिस्सा पूंजी के रूप में रु. 100.00 लाख का बजट उपबंध किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2014-15 में भी निगम के हिस्सा पूंजी के रूप में रु. 100.00 लाख का बजट उपबंध था, जिसका आवंटन विमुक्त किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2015-16 में भी निगम के हिस्सा पूंजी के रूप में रु. 100.00 लाख का बजट उपबंध था, जिसका आवंटन विमुक्त किया गया है।